मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SC पहुंची CM ममता बनर्जी, SIR में गड़बड़ी का लगाया आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SC पहुंची CM ममता बनर्जी, SIR में गड़बड़ी का लगाया आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
Reported By : Atul BhatiaEdited By : Kajal KumariPublished : Feb 01, 2026 07:24 pm IST, Updated : Feb 01, 2026 09:24 pm IST
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं। एसआईआर को लेकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसदों डोला सेन और डेरेक ओब्रायन की याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन याचिकाओं पर चार फरवरी को सुनवाई होने की संभावना है। अब ममता बनर्जी की याचिका पर भी उनके साथ ही हो सकती है सुनवाई।
ममता ने ज्ञानेश कुमार को लिखा था पत्र
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार शाम को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान अपनाई गई कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई। पत्र में बनर्जी ने अपने पहले के पत्रों का हवाला देते हुए दोहराया कि इस प्रक्रिया से लोगों को भारी असुविधा और पीड़ा हुई है, जिसके परिणामस्वरूप इस दौरान लगभग 140 लोगों की मौत हुई है।
ममता बनर्जी ने लगाया था आरोप
ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर को लागू अधिनियम और नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए, मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय विचारों की पूर्ण अवहेलना करते हुए लागू किया गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण के संबंध में, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के प्रावधानों से परे है, मुझे एक बार फिर आपको यह पत्र लिखने के लिए विवश होना पड़ रहा है।”
बनर्जी ने बताया कि भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार, भारतीय निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में लगभग 8,100 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण या सिद्ध विशेषज्ञता के बिना एकतरफा रूप से नियुक्त किया जा रहा है, जबकि उन्होंने इसे एक विशेष, संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया बताया।