शेयर बाजार में बड़ी गिरावट से म्यूचुअल फंड निवेशक भी परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करें क्योंकि उनका भी पोर्टफोलियो लगातार कम हो रहा है।
निप्पॉन इंडिया एक्टिव मोमेंटम फंड में एक मल्टी फैक्टर क्वॉनटिटेटिव मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मकसद बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच संभावित निवेश अवसरों की पहचान करना है।
नेट एसेट वैल्यू फंड की यूनिट या प्रति शेयर की कीमत का मूल्य/मूल्य है। यह वास्तव में म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन का मुख्य संकेतक है। फंड के प्रदर्शन के आधार पर, इसका NAV समय-समय पर बदलता रहता है।
अगले पल होने वाली अनहोनी के बारे में कोई नहीं जानता। भगवान न करें, अगर आपके साथ कोई अनहोनी हो जाए और आप इस दुनिया में रहें तो आपके परिवार का क्या होगा? यही वजह है कि बैंक अकाउंट, एफडी, म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स जैसे तमाम ऐसेट क्लास के लिए नॉमिनी बनाना बहुत जरूरी है।
AMFI के डेटा के मुताबिक, पिछले एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स की लिस्ट में 5वें स्थान पर आईटीआई स्मॉल कैप फंड है। AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने पिछले 1 साल में निवेशकों को 16.13 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
Mutual fund SIP : अपने SIP पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करें। इससे आपको पोर्टफोलियो में बदलाव लाने में मदद मिलेगी। ऐसे फंड की तलाश करें जो लगातार अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करते हों।
एसजीबी तो बंद हो चुका है, लेकिन अगर आप गोल्ड में निवेश करना पसंद करते हैं तो आपके पास अभी भी कई ऑप्शन उपलब्ध हैं। यहां हम आपको गोल्ड में इंवेस्ट करने के लिए अलग-अलग इंवेस्टमेंट टूल्स के बारे में बताएंगे।
गिरते हुए बाजार में STP काफी फायदेमंद साबित होता है, जो आपके नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद करता है। STP की मदद से आप किसी इक्विटी स्कीम से पैसा निकालकर किसी डेट स्कीम में ट्रांसफर कर सकते हैं।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के FAQs में कहा गया है, "अगर सेक्शन 10(10डी) की शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो बीमा पॉलिसी के तहत मिलने वाले रिटर्न कैपिटल गेन्स टैक्स (यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसी के लिए) या अन्य स्रोतों से इनकम (यूएलआईपी के अलावा अन्य पॉलिसी के लिए) के रूप में टैक्स लगाया जा सकता है।"
इंडेक्स फंड में निवेश करने का मुख्य लाभ कम प्रबंधन लागत है। वे कम लागत पर व्यापक बाजार एक्सपोजर दे सकते हैं क्योंकि वे अपने बेंचमार्क का पालन करते हैं और स्टॉक चुनने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता नहीं होती है।
Mutual Fund SIP में सालाना 12 फीसदी का औसत रिटर्न मिल जाता है। अगर आप एकमुश्त पैसा नहीं लगा सकते तो एसआईपी एक अच्छा विकल्प है।
सरकार का फोकस भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को बेहतर बनाने पर है, जिसके तहत 2030 तक नेचुरल गैस की हिस्सेदारी को दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर एनर्जी मिक्स में 15 फीसदी किया जाएगा। सरकार की योजना वित्त वर्ष 24-28 के बीच सालाना 50 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी के लिए बोलियां आमंत्रित की है।
एक्टिव और पैसिव फंड के बीच का निर्णय आपके निवेश लक्ष्यों, जोखिम लेने की क्षमता और प्रबंधन शैली पर निर्भर करता है। अगर आप उच्च रिटर्न चाहते हैं और अधिक शुल्क का भुगतान करने और अधिक जोखिम लेने के लिए तैयार हैं तो एक्विट फंड चुनें। आप कम लागत वाली, लंबी अवधि की निवेश रणनीति पसंद करते हैं तो पैसिव फंड चुनें।
आज हम यहां उन म्यूचुअल फंड स्कीम्स के बारे में जानेंगे, जिन्होंने पिछले 10 साल की अवधि में सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है। इंडिया टीवी पैसा ने आपके लिए AMFI के डेटा को खंगालकर सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली टॉप 5 स्कीम्स की डिटेल्स निकाली है।
कंपनी ने बयान में कहा, “हम MOAMC और उसके अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाई गईं निराधार, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करते हैं। ये निराधार आरोप निहित स्वार्थ वाले लोगों द्वारा जानबूझकर हमारी फर्म और नेतृत्व द्वारा दशकों में बनाई गई अच्छी प्रतिष्ठा को बदनाम करने की कोशिश है।
पैसिव फंडों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया है क्योंकि उनकी एक्सपेंस रेश्यो काफी कम होता है। साथ ही निवेशकों के लिए इसे समझना आसान होता है, जिससे वे रिटेल और अनुभवी दोनों निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं।
पिछले एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स की लिस्ट में 5वें स्थान पर आईटीआई स्मॉल कैप फंड है। AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने पिछले 1 साल में निवेशकों को 22.84 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
सेबी के नियम के अनुसार, स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड अपनी कुल फंड का कम से कम 65% स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करते हैं। वहीं, लार्ज-कैप म्यूचुअल फंडों को अपनी कुल पूंजी का कम से कम 80% लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करना होता है।
बाजार में जारी इस गिरावट की वजह से निवेशकों का म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो भी चौपट हो गया है। हालांकि, बाजार में चल रही इस विनाशकारी गिरावट में भी ऐसी कई म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं, जिन्होंने निवेशकों के पोर्टफोलियो को संभाल कर रखा हुआ है।
2023 में 212 एनएफओ के जरिये 63,854 करोड़ रुपये और 2022 में 228 एनएफओ के जरिये 62,187 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। साल दर साल एनएफओ के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ता जा रहा है।
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